रिपोर्ट-अपूर्व कृष्ण
16 Dec 2025 / 10:10 AM
Forest Conservation: आधी आबादी के हौसले को सलाम. इन्होंने अपनी दिलेरी से झारखंड के गिरिडीह जिले में तीन दशक से 2200 एकड़ में फैले जंगल की हरियाली कायम रखी है. कंधे पर टांगी लेकर जंगल में दहाड़नेवाली महिलाएं टोली बनाकर रोज गश्ती करती हैं. लकड़ी तस्कर भी इनसे खौफ खाते हैं.
Forest Conservation: गिरिडीह (झारखंड)-गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड की अडवारा पंचायत की महिलाएं करीब 30 साल से जंगल बचा रही हैं. यही वजह है कि आज जंगल की हरियाली कायम है. जान जोखिम में डालकर ये लकड़ी तस्करों से भी भिड़ जाती हैं. पहरेदारी का ही नतीजा है कि इन इलाकों में जंगल हरा-भरा है. महिलाएं हर दिन टोली बनाकर जंगल में गश्ती करती हैं. तुकतुको वन बचाओ समिति जंगल सुरक्षा को लेकर मिसाल पेश कर रही है. राज्यस्तर पर इस समिति को सम्मानित किया जा चुका है.
आधी आबादी के हाथों में जंगल की सुरक्षा
गांव के लोगों का जंगल के प्रति ऐसा लगाव है कि लोग इनसे प्रेरणा लेते हैं. तुकतुको वन प्रबंधन समिति से जुड़े महिला-पुरुष जंगल बचाने में आज भी जुटे हैं. यह जंगल अडवारा पंचायत में 2200 एकड़ में फैला हुआ है. पांच से दस की संख्या में महिलाएं टोली बनाकर जंगल की पहरेदारी करती हैं. जंगल में आग नहीं लगाने और पेड़-पौधे नहीं काटने को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाती हैं. पुरुषों के रोजगार के लिए बाहर जाने पर महिलाओं ने जंगल की सुरक्षा की कमान संभाली. पहले गांव के पुरुष वनों की सुरक्षा के लिए निकलते थे.
ये राह उतनी भी नहीं थी आसान
वन बचाओ समिति द्वारा जंगल की सुरक्षा दिन के साथ रात में भी की जाती थी. कई बार जंगल से लकड़ी काटने वाले चोरों को भी रात में खदेड़ा जाता था. यहां तक कई बार उन तस्करों को पकड़ कर दंड भी दिया गया है. लकड़ी तस्करों ने पेड़ों को काटने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता के कारण जंगल को उजड़ने से बचाया जा सका है.
हर रविवार को होती है बैठक
जंगल की सुरक्षा को लेकर हर रविवार को समीक्षात्मक बैठक होती है. इसमें जंगल की गतिविधि और पशु-पक्षियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा की जाती है. मोर, नीलगाय, हिरण, भेड़िया, सियार, अजगर समेत अन्य पशु-पक्षी जंगल में हैं.
जंगल से ही जीवन है-महिलाएं
पार्वती देवी कहती हैं कि जंगल ही उनका सब कुछ है. वे जंगल की सुरक्षा में लगी रहती हैं. तीन दशक से वे जंगल बचाती आ रही हैं. गायत्री देवी बताती हैं कि जंगल में कई तरह के जीव-जंतुओं का आशियाना है. इन्हें बचाना जरूरी है. ये रहेंगे तभी हम सभी सुरक्षित रहेंगे.
जंगल सुरक्षा के लिए मिल चुका है सम्मान-भुनेश्वर महतो
तुकतुको वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भुनेश्वर महतो ने कहा कि जंगल और जमीन हमारी धरोहर हैं. महिलाएं इनकी सुरक्षा में लगी हैं. यह सराहनीय कदम है. तुकतुको वन प्रबंधन समिति जंगल सुरक्षा को लेकर राज्य स्तर पर भी सम्मानित हो चुकी है.
थर-थर कांपते हैं लकड़ी तस्कर
तुकतुको जंगल की हरियाली बचानेवालों में रश्मि देवी, ननकी देवी, सुधा देवी, आशा देवी, जहली देवी, कन्हैया महतो और हेमंत महतो समेत कई अन्य महिलाएं लगी हुई हैं. इनकी दिलेरी का ही असर है कि जंगल हरे-भरे हैं. पक्षियों की चहचहाहट आज भी गूंज रही है. इनका खौफ ऐसा है कि लकड़ी तस्कर भी इनसे थर-थर कांपते हैं.